
कार्यक्षेत्र
रेरा (रियल एस्टेट मामले)
कब्ज़े में देरी, रिफंड एवं बिल्डर-खरीदार विवाद — रेरा के समक्ष।
इसमें क्या शामिल है
गाज़ियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के खरीदारों के सामने प्रायः तीन ही समस्याएँ होती हैं: वर्षों तक कब्ज़ा न मिलना, वादा की गई सुविधाएँ न देना, और रिफंड अनुरोध की अनदेखी।
देरी पर ब्याज, ब्याज सहित रिफंड और मुआवज़े हेतु यूपी रेरा एवं न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत दाखिल की जाती है, तथा आवश्यकता पर अपीलीय अधिकरण में अपील की जाती है।
हस्ताक्षर से पहले बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की जाँच भी की जाती है — बाद के मुकदमे से कहीं सस्ता।
सामान्यतः देखे जाने वाले मामले
- कब्ज़े में देरी पर ब्याज
- ब्याज सहित रिफंड एवं मुआवज़ा
- बिल्डर-बायर एग्रीमेंट की अनुचित शर्तें
- रेरा अपीलीय अधिकरण में अपील
- रेरा आदेशों का निष्पादन
रेरा (रियल एस्टेट मामले)
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