Child Custody legal practice — Advocate Sumit Tyagi, Ghaziabad

कार्यक्षेत्र

बच्चों की अभिरक्षा

अभिरक्षा, संरक्षकता एवं मुलाक़ात अधिकार — बच्चे के हित में।

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इसमें क्या शामिल है

अभिरक्षा के मामलों में न्यायालय सबसे पहले यही देखता है कि कौन-सी व्यवस्था बच्चे के कल्याण में है। इसलिए हर दस्तावेज़ भावना के बजाय साक्ष्य से यह उत्तर देना चाहिए।

गाज़ियाबाद, नोएडा एवं दिल्ली के परिवार न्यायालयों में गार्जियन्स एंड वार्ड्स एक्ट तथा हिंदू अल्पवयस्कता एवं संरक्षकता अधिनियम के तहत अभिरक्षा, अंतरिम अभिरक्षा, संरक्षकता प्रमाणपत्र एवं मुलाक़ात कार्यक्रम हेतु याचिकाएँ दाखिल की जाती हैं।

जहाँ माता-पिता सहमत पालन-योजना पर आ सकें, वह रास्ता पहले अपनाया जाता है — यह तेज़, किफायती और बच्चे के लिए कम हानिकारक है।

सामान्यतः देखे जाने वाले मामले

  • स्थायी एवं अंतरिम अभिरक्षा याचिकाएँ
  • अल्पवयस्कों हेतु संरक्षकता प्रमाणपत्र
  • मुलाक़ात एवं अवकाश भेंट कार्यक्रम
  • मौजूदा अभिरक्षा आदेशों का पालन कराना
  • स्थान परिवर्तन एवं सीमा-पार मामलों में अभिरक्षा

बच्चों की अभिरक्षा

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